प्रो. सुदीप कुमार जैन का संक्षिप्त-परिचय

प्रो. सुदीप कुमार जैन का जन्म उत्तर प्रदेश की धर्मनगरी 'ललितपुर' में सन् 1962 में एक धर्मप्राण परिवार में हुआ. आपके पिताश्री लाला चम्पालाल जी जैन सुप्रतिष्ठित व्यवसायी एवं मुमुक्षु-विद्वान् थे. वे सन् 1948 से गुरुदेव श्री कानजीस्वामी के पावन संपर्क में आये और तभी से उन्होंने ललितपुर में आध्यात्मिक तत्त्वज्ञान की गोष्ठी प्रारम्भ की थी, जो आज एक व्यापकरूप ले चुकी है. वे आज भले ही दैहिकरूप में विद्यमान नहीं हैं, किन्तु उनके द्वारा तत्त्वज्ञान से सींची गयी मुमुक्षुओं की पूरी बगिया आज भी वहाँ लहलहा रही है. आपकी माताजी श्रीमती शांति देवी जैन एक धर्मप्राण-गृहिणी हैं, जो आज भी अपनी उत्कृष्ट-धर्मसाधना के साथ पूरे परिवार और समाज को वात्सल्य प्रदान कर रहीं हैं.

        प्रो. सुदीप कुमार जैन ने प्रारम्भिक-शिक्षा ललितपुर में ही ग्रहण की और संपूर्ण प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ-छात्र का गौरव प्राप्त किया. फिर विशेष धर्मरुचि होने के कारण उनके पिताजी ने उन्हें स्नातक-शिक्षण के लिये पं. टोडरमल दि. जैन सिद्धांत महाविद्यालय, जयपुर में प्रथम-बैच में प्रवेश दिलाया. वहाँ रहकर अध्ययन करते हुये उन्होंने राजस्थान-विश्वविद्यालय की 'जैनदर्शन-शास्त्री' परीक्षा मैरिट में द्वितीय-स्थान प्राप्त कर उत्तीर्ण की. यहाँ संस्कृतभाषा का समुचितज्ञान प्राप्त करने के बाद जैनागमों की प्राकृतभाषा का ज्ञान अर्जित करने के लिये उदयपुर(राजस्थान) के सुखाड़िया विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया और प्राकृतभाषा एवं साहित्य से एम.ए. की उपाधि स्वर्णपदक सहित प्राप्त की. इस परीक्षा में उन्होंने संपूर्ण-विश्वविद्यालय में सर्वोच्च-अंक प्राप्त कर कीर्तिमान स्थापित किया. इसके बाद आगामी-अध्ययन के लिये वे वापस जयपुर राजस्थान विश्वविद्यालय लौटे और यहाँ ले उन्होंने पूरे विश्वविद्यालय में सर्वोच्च-अंक प्राप्त करते हुये स्वर्णपदक-सहित 'संस्कृत-एम.ए.' की उपाधि प्राप्त की , साथ ही छठवीं शताब्दी ई. के महान् आध्यात्मिक-संत 'आचार्य-योगीन्द्रदेव के व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व' पर पीएच. डी. की डॉक्टरेट-उपाधि प्राप्त की.
इसके उपरांत वे आजीविका के निमित्त राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली आये और यहाँ के प्रसिद्ध 'बी.एल. इन्स्टीट्यूट ऑफ इंडोलॉजी' के प्रथम निदेशक बने. इसी दौरान केन्द्र-सरकार के संस्थान ' श्री लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ, नई दिल्ली' में जैनदर्शन-विभाग में व्याख्याता-पद पर नियुक्त होने के कारण वे निदेशक-पद छोड़कर केन्द्र-सरकार की सेवा में इस नये पद पर कार्यरत हुये.
यहाँ पर आप विगत 28 वर्षों से गरिमापूर्वक कार्यरत हैं. इस संस्थान में आपने विभागाध्यक्ष, संकायप्रमुख( डीन), परीक्षाप्रभारी, चेयरमैन- रोस्टर कमेटी, मेंबर-बोर्ड ऑफ मैनेज़मेंट, मेंबर-बोर्ड ऑफ स्टडीज़, विविध पाठ्यक्रमों के संयोजक, विविध- समितियों के अध्यक्ष व सदस्य, विभिन्न राष्ट्रीय  संगोष्ठियों व कार्यशालाओं के संयोजक आदि अनेकों पदों पर गरिमापूर्वक कार्य किया और नये प्रतिमान स्थापित किये. सम्प्रति आप इसी विश्वविद्यालय में प्राकृतभाषा विभाग में प्रोफेसर एवं संकायप्रमुख-शैक्षणिक(Dean, Academic) के पद पर कार्यरत हैं |
तथा जैन विश्व भारती संस्थान, लाड़नूँ(राजस्थान) में प्राकृतभाषा एवं जैनविद्या के 'प्रोफेसर इमेरिटस' के पद पर भी सुशोभित हैं |

इसके अतिरिक्त अन्य विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक-संस्थानों की विभिन्न उच्चस्तरीय समितियों के कई पदों पर ससम्मान कार्य किया.

रचनायें:--- अद्यावधि जैनदर्शन, भाषाशास्त्र आदि विविध विषयों की 38 पुस्तकों का लेखन/संपादन/ प्रस्तावना/ संकलन | 180 से अधिक उच्चस्तरीय शोधलेखों का निर्माण, 50 कवितायें, 3 नाटक, 25 राष्ट्रीय समाचारपत्रों में लेख, 100 से अधिक समीक्षायें आदि प्रकाशित हो चुकी हैं. अभी भी लेखनी अनवरतरूप से गतिशील है. सम्प्रति विभिन्न वॉट्सएप-ग्रुपों में उच्चस्तरीय लेख, कवितायें, व समीक्षायें निरंतर आतीं रहती हैं. वॉट्सएप पर ही प्राकृतभाषा एवं खारवेल-अभिलेख पर महीनों तक कक्षायें चलाकर इन्हें पढाया |
पत्रकारिता:---- 'प्राकृतविद्या' नामक त्रैमासिकी शोधपत्रिका का 9 वर्षों तक, एवं ' सन्मति-सन्देश' नामक मासिक पत्रिका का 7 वर्षों तक गरिमापूर्ण संपादन किया, जिसकी चर्चा आज भी विद्वत्-जगत् में होती है |
सम्मान:--- 1.वर्ष 2002 का सर्वश्रेष्ठ-युवा-विद्वान् का राष्ट्रपति-सम्मान (बादरायण व्यास सम्मान).
2. गोम्मटेश-विद्यापीठ-प्रशस्ति (वर्ष 2003).
3.सर्वश्रेष्ठ शोध-सम्पादक का राष्ट्रीय सम्मान, दि. जैन महासमिति द्वारा (वर्ष 1999)
4. सर्वश्रेष्ठ पत्रकारिता सम्मान, अहिंसा इण्टरनेशनल द्वारा (वर्ष2000.)
5. भारत-ज्योति-सम्मान, इंडिया इंटरनेशनल फ्रेंडशिप सोसायटी द्वारा (वर्ष2012.)

इनके अतिरिक्त अनेकों सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थानों द्वारा समय समय पर अनेकों बार सम्मानित हुये. अमेरिका एवं कनाडा  आदि देशों में भी तत्त्वप्रचार के लिये गये एवं  देश-विदेश के विभिन्न टी.वी. चैनलों पर अनेकों बार भेंटवार्तायें, व्याख्यान आदि आयोजित हो चुके हैं |

समाजसेवा:--- एक समर्पित स्वाध्यायी विद्वान् के रूप में देशभर में स्वाध्याय एवं तत्त्वप्रचार के द्वारा समाजसेवा करते हुये अनेकों सामाजिक संगठनों ( यथा--- दि. जैन मुमुक्षु मंडल,दिल्ली; महावीर दि. जैन सभा, दिल्ली; महावीर परमार्थ फाउण्डेशन, दिल्ली; जैन यूथ फैडरेशन,दिल्ली आदि ) के प्रमुख-पदों पर गरिमापूर्वक कार्य किया और कर रहे हैं.

 

 

प्रोफ़ेसर सुदीप कुमार जैन, नई दिल्ली