प्रमाण बड़े या विवेक बड़ा

प्रथम किस्त

मुझे धवलाकार महाज्ञानी आचार्य वीरसेन स्वामी का एक उद्धरण स्मरण आ रहा है, जिसमें वे कहते हैं कि "पण्णवणिज्जा भावा अणंतभागो दु अणभिलप्पाणं…और पढ़ें

द्वितीय किस्त

(पिछली किस्त में आपने पंचामृत-अभिषेक की हिंसा-मूलकता एवं बहुत-आरम्भ और परिग्रह-मूलकता का स्पष्ट-विवरण देखा था। उसके संबंध में आगत कुछ जिज्ञासाओं के संक्षिप्त-समाधानपूर्वक समीक्षा इस किस्त में प्रस्तुत की जायेगी। स्त्रियों को जिनबिम्ब का स्पर्श व अभिषेक करना चाहिये या नहीं?-- इस विषय पर अगली किस्त में विवेचन प्रस्तुत किया जायेगा …और पढ़ें

तृतीय किस्त

(पहली किस्त में आपने पंचामृत-अभिषेक की हिंसा-मूलकता एवं बहुत-आरम्भ और परिग्रह-मूलकता का स्पष्ट विवरण देखा था। उसके संबंध में आगत कुछ जिज्ञासाओं के संक्षिप्त-समाधान पूर्वक समीक्षा दूसरी किस्त में प्रस्तुत की गयी। स्त्रियों को जिनबिम्ब का स्पर्श व अभिषेक करना चाहिये या नहीं?-- इस विषय पर प्रस्तुत किस्त में विवेचन प्रस्तुत किया जायेगा …और पढ़ें

चतुर्थ किस्त

(पहली किस्त में आपने पंचामृत-अभिषेक की हिंसा-मूलकता एवं बहुत-आरम्भ और परिग्रह-मूलकता का स्पष्ट विवरण देखा था। उसके संबंध में आगत कुछ जिज्ञासाओं के संक्षिप्त-समाधानपूर्वक समीक्षा दूसरी किस्त में प्रस्तुत की गयी। स्त्रियों को जिनबिम्ब का स्पर्श व अभिषेक करना चाहिये या नहीं?-- इस विषय पर तृतीय-किस्त में विवेचन प्रस्तुत किया गया ।…और पढ़ें

पाँचवीं किस्त

आज शांति की 'भावना' वाले जैनधर्म को शांति की 'कामना' वाला धर्म बनाने का सुनियोजित-षड्यंत्र चल रहा है। और बड़े से बड़े विचारक, तपस्वी(?) एवं विद्वान् (?) भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। से सब मिलकर वीतरागी-जैनधर्म ।…और पढ़ें

छठवीं किस्त

आज शांति की 'भावना' वाले जैनधर्म को शांति की 'कामना' वाला धर्म बनाने का सुनियोजित-षड्यंत्र चल रहा है। और बड़े से बड़े विचारक, तपस्वी(?) एवं विद्वान् (?) भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। से सब मिलकर वीतरागी-जैनधर्म ।…और पढ़ें

सातवीं किस्त

आज शांति की 'भावना' वाले जैनधर्म को शांति की 'कामना' वाला धर्म बनाने का सुनियोजित-षड्यंत्र चल रहा है। और बड़े से बड़े विचारक, तपस्वी(?) एवं विद्वान् (?) भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। ये सब मिलकर ।…और पढ़ें

आठवीं किस्त

आज शांति की 'भावना' वाले जैनधर्म को शांति की 'कामना' वाला धर्म बनाने का सुनियोजित-षड्यंत्र चल रहा है। और बड़े से बड़े विचारक, तपस्वी(?) एवं विद्वान् (?) भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। ये सब मिलकर ।…और पढ़ें

नौवीं किस्त

आज शांति की 'भावना' वाले जैनधर्म को शांति की 'कामना' वाला धर्म बनाने का सुनियोजित-षड्यंत्र चल रहा है। और बड़े से बड़े विचारक, तपस्वी(?) एवं विद्वान् (?) भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। ये सब मिलकर वीतरागी-जैनधर्म और इसके आदर्श वीतरागी-देव के स्वरूप ।…और पढ़ें

दसवीं किस्त

आज शांति की 'भावना' वाले जैनधर्म को शांति की 'कामना' वाला धर्म बनाने का सुनियोजित-षड्यंत्र चल रहा है। और बड़े से बड़े विचारक, तपस्वी(?) एवं विद्वान् (?) भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। ये सब मिलकर वीतरागी-जैनधर्म और इसके आदर्श वीतरागी-देव के स्वरूप को विकृत करने के लिये कृतसंकल्प ।…और पढ़ें

ग्यारहवीं किस्त

आज शांति की 'भावना' वाले जैनधर्म को शांति की 'कामना' वाला धर्म बनाने का सुनियोजित-षड्यंत्र चल रहा है। और बड़े से बड़े विचारक, तपस्वी(?) एवं विद्वान् (?) भी इसकी चपेट में आ चुके हैं। ये सब मिलकर वीतरागी-जैनधर्म और इसके आदर्श वीतरागी-देव ।…और पढ़ें

प्रोफ़ेसर सुदीप कुमार जैन, नई दिल्ली